शहादत व सम्मान



देश के लिए शहादत देने से बड़ा बलिदान दुनिया में कोई नहीं होता है। कौमे अपने शहीदो को भूल जाती है जो कोमे अपने शहीदो को सम्मान देने से चूक जाती है वो कोमे अपने भविष्य की हिफाजत से चूक जाती है। शहीदो की मजारो पर मेले यू ही नहीं लगते हैं बल्कि ये मेले अपनी नई पीढ़ी को यह जताने का पैगाम होता है कि जब भी वतन की मिट्टी पर कोई खतरा आये तो उसकी सुरक्षा के लिए अपने प्राणो की आहुति देने के लिए हर नागरिक तैयार रहे। यह देश लाखो बलिदान की बुनियाद पर खड़ा है। इस देश को लाखो -करोडो़ जवानो ने अपने खून से सिंचा है जिसकी बदौलत हम " मेरा भारत महान  " सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा "जैसे गीत गुनगुनाने हुए फूलों की तरह खिलते हुए आगे बढ़ने है। इस देश ने सदियों से कई बार करवटें बदली। इस देश की सरजमी पर सैंकड़ों युद्ध लड़के गये। विदेशी आक्रमणों का मुँहतोड़  जवाब दिया गया। कभी कभार कदम डगमगाये भी लेकिन हर बार दुगुने जोश के साथ दुबारा खड़ा हो गया। इस देश की जनता के खून में देश प्रेम कुटकुट कर भरा हुआ है। हम कभी नाकामियो से निराश नहीं हुए। हम कभी हार से नहीं टुटे। हर बार हर हालात का बेहतरी के साथ मुकाबला किया है व आगे भी करते रहेंगे। देशभर में बने शहीद स्मारक हमे हमेशा याद दिलाते है कि देश की सुरक्षा से बड़ा कोई कार्य नहीं होता है। यह स्मारक देश की जिंदा होने की आवाज़ देते हुए नजर आते हैं। यह स्मारक हमारे भटकते हुए कदमो को थामने का संदेश देते हैं। राजस्थान के गाँव - गाँव के चोराहो पर चाहे सरकारी दिशा सूचक बोर्ड न नजर आये लेकिन शहीदो के स्टैच्यू हमे देश की दिशा बताते नजर आते हैं। इन स्मारको की हालत शहीदो के प्रति सम्मान की भावना का नमूना हमारे सामने प्रस्तुत करती नजर आती है। हमे जरुरत है कि प्राथमिक स्कूलो से लेकर विश्वविद्यालय तक के प्रांगण में शहीद स्मारक बनाने की ताकि आज का युवा इन स्मारको को नमन करते हुए निकलेगा तो देश दिल में बशेगा। यह स्मारक हमारी युवा पीढ़ी को रोज दशा दिशा बताते रहेगे हर शहीद की जीवनी उसके गाँव में पढाई जानी चाहिए व तहसील स्तर पर उसी तहसील के शहीदो की यादगार व भावी पीढ़ी को नसीहत देता।। शहीद म्यूजियम बनना चाहिए। इसी प्रकार जिला स्तर व राज्य स्तर पर इसी प्रकार के म्यूजियम बनने चाहिए। केन्द्र सरकार ने दिल्ली में इसी तरह का शहीद म्यूजियम बनाने की पहल की है जो एक प्रशंसनीय कार्य है। इसी प्रकार सरकारो को चाहिए कि देश के हर शहीद का डाटा एक वेब पोर्टल के माध्यम से संग्रित करके देश भर के युवाओ को उपलब्ध करवाये। शहीदो की प्रेरक जीवनीयो को स्कूली पाठ्यक्रम में बिना किसी भेदभाव के शामिल करे। शहीद किसी जाती धर्म संप्रदाय का नहीं होता है। वो पुरे देश का शहीद होता है और पूरा देश हर शहीद को सम्मान दे ताकि हमारी भटकती भावी पीढ़ी को नसीहत मिलती रहे। कुछ लोग सेना के जवानो पर आरोप प्रत्यारोप करते हैं। कुछ लोग जाती धर्म के नाम पर शहीदो में भेदभाव करते हैं उन लोगो को नजर अंदाज करिये ऐसे लोगों को हतोत्साहित करिये। आपको बता देना चाहता हूँ कि ऐसे लोगों की हरकतो से हमे विचलित होने की कोई जरुरत नहीं है। ऐसे जयचंदो से इतिहास भरा पड़ा है। लेकिन इनसे देश ना ही रुकता है ना झुकता है। आजादी की नींव किसी राजनेता के भाषणो की खोखली इंटो से नहीं पडी़ है। हमे आजादी भीख में नहीं मिली थी। भगत सिंह जैसे सेकडो़ युवा हसते हसते फाँसी के फंदो पर झुले थे। हमने आजादी छिनकर ली है। आजादी जो छिनकर ली जाति है उसकी नींव बलिदानो के ब्रिक्स से पडी़ होती है। आज भी जब देश पर कोई आँच आती है तो बुजुर्ग बहादुरशाह बनकर खड़े हों जाते हैं तो युवा भगत सिंह की तरह जोश में आकर हमे रोज विश्वास दिलाते है कि यह देश आबाद था आबाद है व आबाद रहेगा। सदियो से जकडी़ गुलामी की मानसिकता कभी कभार हमने भी महसूस की है। कुछ लोगो की अनगर्ल बातो का सामना आज भी हम कर रहे हैं उसका डटकर मुकाबला हम अलग तरीके से करेंगे लेकिन देश के शहीदो की शहादत पर लाछना हमे स्वीकार नही होना चाहिए। हर नागरिक का कर्तव्य हैं कि हमारी सेनाओ का मनोबल हमेशा उँचा रहे उसके लिए हम कार्य करते रहे। कुछ असामाजिक तत्व शहीदो की मूर्तियाँ तोड़ देते हैं। ऐसे लोगों पर देश दरोह का मुकदमा लगाकर सलाखो के पिछे भेजा जाना चाहिए ताकि ऐसे अपराधी प्रवृत्ति के लोग युवाओ के दिलो में उपजी देश प्रेम की भावना को ठेस न पंहुचा सके।

                        जय हिंद जय भारत 

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