अमर शहीद जगदीश प्रसाद बिशनोई



शहीद जगदीश प्रसाद बिशनोई का जन्म 15 जनवरी 1981 को बीकानेर की नोखा तहसील के जेगला गांव में श्री अर्जुन राम बिशनोई के घर हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के ही राजकीय उच्च प्राथमिक विधालय में हुई। उसके पश्चात कक्षा 6 से 12 तक की पढा़ई राजकीय बाबा छोटूनाथ उच्च माध्यमिक विद्यालय नोखा में हुई। जगदीश शुरू से ही पढाई मे अच्छे थे इसके साथ ही हैंडबाँल व बास्केटबॉल के खिलाड़ी रहे। उन्होने अपनी उच्च शिक्षा राजकीय मांगीलाल बागडी़ महाविधालय नोखा से कला संकाय में पूर्ण की। सन् 2000 में स्नातक करने के पश्चात राजनीति विज्ञान में 2002 मास्टर डिग्री हासिल की। अपने जीवन की पहली ही परीक्षा में सीआरपीएफ कांस्टेबल के रुप में 2003 में चयनित हुए तथा केरल में उन्हें ट्रेनिंग दी गई। इसके पश्चात उन्हें पहली फील्ड पोस्टिंग वैष्णो दैवी मंदिर जम्मू में मिली। केरल में ट्रेनिंग के दौरान अपनी खेल प्रतिभा का अच्छा उदाहरण देते हुए अपनी टीम को विजेता बनाया। 25 जनवरी  2007 को इनका विवाह रचना बिशनोई के साथ हुआ। 2009 से 2011 तक आपकी पोस्टिंग फैजाबाद में रही। 12 फरवरी 2009 को पहली संतान के रुप में पुत्री आस्था का जन्म हुआ। 2012 में आपका हवलदार में चयन हुआ। जुलाई 2003 से मार्च 2017 तक की अपनी सेवा में कई कोर्सेज और प्रशिक्षण प्राप्त किए। 2012 में शहीद जगदीश बिशनोई की पोस्टिंग केरल में ट्रेनिंग सेंटर में हुई जहाँ हवलदार के रुप में अपनी सेवाएं दी। इस दौरान उन्होने नौजवानौ को बेहतरीन ट्रेनिंग दी। 7 सितम्बर 2014 को जगदीश को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जिसका नाम आरव रखा। जून 2015 तक केरल में रहने के पश्चात इन्हें पुनः 2015 में सुकमा छतीसगढ़ में भेजा गया। क्योंकि यह एक अच्छे प्रशिक्षक, शूटर व बुलन्द इरादो वाले जवान थे। बडो़ के लिए आदर और छोटो के लिए प्रेम ही इनकी पहचान थी।
11 मार्च 2017 को रोज की तरह ही सड़क निर्माण कार्य में सुरक्षा देने के लिए जैसे ही रोड़ ओपनिंग पार्टी निकली। घात लगाकर बेठे तकरीबन 200-300 नक्सलियो ने उन्हें व उनके साथियों को घेर लिया। नक्सलियो के साथ फायरिंंग हुई। जाबांज सिपाही ने जगदीश ने कई राउन्ड फायर किए और अपने कई साथियों की जान बचाई। इस दौरान तीन गोलियां उन्हें भी लगी लेकिन वो पीछे नहीं हटे। जब तक जान थी लड़ते रहे। राष्ट्र प्रेम व कर्तव्य का परिचय कराती देते हुए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया और वीरगति को प्राप्त हुए। हमें उनकी शहादत पर हमेशा गर्व रहेगा। वो हमारे दिलो में सदैव जीवित रहेंगे। जगदीश प्रसाद का जीवन परिचय लिखते हुए हम गौरवान्वित महसूस करता हूँ।

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